अलविदा, नुसरत बद्र जी! (श्रद्धांजलि)

Nusrat Badr

श्री नुसरत बद्र (28 सितम्बर 1962 – 23 जनवरी 2020)

शायर-गीतकार नुसरत बद्र का गुरुवार 23 जनवरी 2020 को निधन हो गया। वे कुछ अरसे से बीमार चल रहे थें।

उनका जन्म भोपाल में हुआ और वे मशहूर शायर बशीर बद्र के बेटे थें। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने शायरी और गीतों की ओर रूख किया। पर जब ये राह चुनी, तो पिता की राह चलना तो छोड़ा ही, अपने बल पर कुछ करने की तमन्ना में पिता का घर तक छोड़ दिया। अपने लम्बे कैरियर में उन्होंने क़रीब 104 फ़िल्मों में 800 के ऊपर गीत लिखें। देवदास, सांवरिया, दीवार: लैट्स ब्रिंग आर हीरोज़ होम और दीवानगी आदि उनकी प्रमुख फिल्मों में से हैं। निर्देशक संजय लीला भंसाली की फ़िल्म देवदास के लिए लिखे गए उनके गीत ‘डोला रे डोला’ और ‘हमपे ये किसने हरा रंग डाला’ ख़ासे चर्चित रहें। इस फ़िल्म के लिए लिखे उनके बाक़ी गीत जैसे ‘छलक छलक’, ‘बैरी पिया’, ‘काहे छेड़े’, ‘सिलसिला ये चाहत का’ आदि भी बेहद पसंद किए गए। देवदास के सभी गीत नुसरत बद्र जी ने लिखे थें, सिवाय ‘मोरे पिया’ को छोड़कर, जिसके गीतकार समीर थें। ‘डोला रे डोला’ के लिए नुसरत बद्र जी को 2002 में फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार के लिए नामांकन भी मिला। गायक सोनू निगम के 2004 में आए मशहूर एल्बम चंदा की डोली के लिए भी उन्होंने गीत लिखे।

स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन और इसके सभी सदस्य श्री नुसरत बद्र जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं और परमपिता ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हैं।