Mythology and Screenwriting

Great Scripts Need Complex Characters

A Short Online Course 
(organized by WWI, in association with SWA)
 
3 weekends, 20 hours | August 2020
 
 
 
1. Storytelling & Screenwriting: A Refresher
   
Saturday, August 1, 10 AM to 12 noon
 
A substantial revisitation of the vital importance of storytelling in our lives and in our culture. How stories not just help us make sense of the world, but make our lives more meaningful. Screenwriting as a form of storytelling, further enhancing our experience of the challenges of life, its people and relationships. 
 
 
2. Why Contradictory Characters are Gold for a Script
   
Saturday, August 1, 12-2 PM
 
What makes our stories and scripts more vibrant, more life-like is the inner turmoil, the unresolved issues of the characters. As they battle the challenges of the plot, they have to also deal with their own conflicting feelings, contrary desires, and other internal shadows of fear, anxiety, doubt, guilt, hurt, etc., which tend to complicate their decisions and actions, thereby enhancing the story experience of the viewer.
 
 
3. Mythic Characters and Indian Cinema: Recurring Dilemmas, Eternal Themes
 
Sunday, August 2, 10 AM – 2 PM
 
Mythology continues to influence much of our culture, our personal ideology, beliefs, as also our cinema. The stories of our films frequently borrow their dramatic energy from mythic characters, many times unknowingly. The depth of the internal world of the character and the seemingly insurmountable challenges that s/he faces, give tremendous power to the film’s story and create a wide resonance with the audience. Here we discuss some of the mythic characters and elements that have used in our cinema.
 
 
4. Ramayana: The Long and Lonely Struggle of the Hero
 
Saturday, August 8, 10 AM to 2 PM
 
Of our two greatly loved epics, the Ramayana is obviously the more revered one, where the protagonist has divine status. Our TV serials may have reduced it to a tale of binaries, of black and white, but it is clearly a very complex and deep story. A story of the impossible challenges faced by him and by Sita, of painful consequences of others’ follies that they had to suffer, of
the terrible choices that he had to make impacting their lives in the most tragic way. What makes it a great story? What do we learn from the structure of the story, and the narrative techniques it uses? In short, why is a study of the Ramayana so helpful for writers? 
 
 
5. Kaikeyi, Dashratha, Kausalya: Heralding an Inevitable Storm
 
Sunday, August 9, 10 AM – 12 noon
 
While Kaikeyi is accorded the dubious credit of having caused the tragedy of the Ramayana by getting Rama exiled to give her son the throne, the roots of this terrible twist are perhaps to be found in the underlying layer of Dashratha’s relationship with her, and in the Kausalya factor. Above all, the personalities of the three perhaps made the tragedy inevitable. And, this is what we seek in our stories – the breathtaking inevitability of the dramatic twists and turns, and how the human nature of the character/s becomes destiny.
 
 
6. Rama, Sita, Raavana: The Eternal Triangle
 
Sunday, August 9, 12-2 PM
 
Raavana’s relentlessly obsessive desire for Sita, against every bit of wise advice, made the huge battle imperative. What it also did is strike a fatal blow to Rama’s relationship with Sita. What really were the contours of this triangle? What does it say about Raavana that he refused to force himself upon her? And, Sita’s love for Rama? And, why did this strongest of love relationships end in painful tragedy for both? What does this archetypal triangular tension tell us about the power with which underlying fault-lines within characters bring inevitable pain to their relationships?
 
 
7. Screenwriter as Mythmaker: Enriching Society With Deep Stories
 
Saturday, August 15, 10 AM – 2 PM
 
Stories, and films, influence the way we view and experience the human condition. Stories with depth catalyse our awareness of the hidden layers of our inner worlds that determine our surface choices and actions. Such stories emerge from the creativity of writers through their sensitive observations, their honest introspection and their empathy for the human condition, thereby leading to timeless memorable films that we continue to be moved by every time we revisit them in our minds. In short, we can make myths too.
 
 
Fees for SWA Members with valid membership: INR 5000/- (inclusive of GST)
 
 
 
Fees for Non-members: INR 6000/- (inclusive of GST)
 
 
 
(For individual sessions: INR 1150/- for SWA members with valid membership, INR 1300/- for non-SWA members)
 
For queries send an email to: kanchi.parikh@whistlingwoods.net
 
 
Poster
 
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माइथोलॉजी और स्क्रीनराइटिंग

अच्छी स्क्रिप्ट चाहे विविधता से भरे किरदार

शार्ट ऑनलाइन कोर्स
(WWI द्वारा आयोजित, SWA के सहयोग से)
 
3 सप्ताहांत, 20  घंटें | अगस्त 2020
 
 
1. कहानी कहने की कला और स्क्रीनराइटिंग: रिफ़्रेशर सैशन
(Storytelling & Screenwriting: A Refresher)   
 
शनिवार, 1 अगस्त, प्रातः 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक
 
हमारी संस्कृति और जीवन में कहानी कहने की कला की महत्ता पर एक ज़रूरी नज़र। किस तरह कहानी ना सिर्फ हमें दुनिया का स्वरुप समझाती है बल्कि हमारे जीवन को भी अर्थ देती है। स्क्रीनराइटिंग कहानी कहने की विधा है जो जीवन और समस्याओं के हमारे अनुभवों और इंसानी रिश्तों के स्वभाव में झांकती है।
 
 
2. विरोधाभासी किरदार स्क्रिप्ट के लिए सोने की ख़ान क्यों हैं
(Why Contradictory Characters are Gold for a Script)   
 
शनिवार, 1 अगस्त, दोपहर 12 से 2 बजे तक
 
किरदार के अंदरूनी संघर्ष और अनसुलझे मुद्दों से हमारी कहानियां और स्क्रिप्ट जीवंत और सच के क़रीब बनती हैं। जैसे जैसे वे प्लॉट में पैदा होने वाले समस्याओं से जूझते हैं वैसे ही उन्हें अपनी विरोधाभासी अनुभूतियों, इच्छाओं और भय, चिंता, शंका, अपराधबोध, पीड़ा के गहन भावों से भी लड़ना होता है जिसके कारण उनके निर्णय और प्रतिक्रिया प्रभावित होते हैं और दर्शक को कहानी में अधिक रस आता है।
3. पौराणिक किरदार और भारतीय सिनेमा: शाश्वत दुविधाएं और थीम
(Mythic Characters and Indian Cinema: Recurring Dilemmas, Eternal Themes)   
 
शनिवार, 2 अगस्त, प्रातः 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक
 
पौराणिक कथाएं आज भी हमारी संस्कृति, व्यक्तिगत विचारधारा, धारणा और सिनेमा को प्रभावित करती हैं। हमारी फिल्मों की कहानियां अक्सर अपनी ऊर्जा पौराणिक कथाओं से प्राप्त करती हैं, कई बार तो अनजाने में। किरदार की अंदरूनी दुनिया की गहराई, उसकी दुर्गम चुनौतियाँ फिल्म की कहानी को ताकत और दर्शक को उसे ख़ुद से जोड़ने का कारण देती है। इस सैशन में कुछ ऐसे पौराणिक किरदारों और तत्वों की बात की जाएगी जिनका हमारे सिनेमा में इस्तेमाल हुआ है।
 
4. रामायण: नायक का लंबा और एकाकी संघर्ष  
(Ramayana: The Long and Lonely Struggle of the Hero)  
 
शनिवार, 8 अगस्त, प्रातः 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक
 
हमारे दो सबसे चहेते पुराणों में रामायण हमें अधिक प्रिय और श्रद्धेय  है जिसके नायक को ईश्वरत्व प्राप्त है। हमारे टीवी सीरियलों ने चाहे इसे श्वेत-श्याम और द्विपक्षीय कर दिया हो, लेकिन ये साफ़ है कि ये बड़ी गहन और जटिल कहानी है। राम और सीता ने दुर्गम चुनौतियों का सामना किया, दूसरों की ग़लतियों के पीड़ादायक नतीजों को स्वीकार किया, उन्हें कई तरह के ऐसे निर्णय लेने पड़े जिनके दूरगामी परिणाम बेहद कष्टदायक रहे। ऐसा क्या है जो इसे महान कथा बनाता है? इसके कथानक की संरचना और तकनीकों से हम क्या सीखते हैं? दूसरे शब्दों में – रामायण का अध्ययन लेखकों के लिए किस प्रकार लाभकारी है? 
 
 
5. कैकेयी, दशरथ, कौशल्या: एक अपरिहार्य तूफ़ान के संकेत  
(Kaikeyi, Dashratha, Kausalya: Heralding an Inevitable Storm)   
 
रविवार, 9 अगस्त, सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक
 
एक और कैकेयी को रामायण में होने वाली त्रासदी के लिए दोष दिया जाता है, कि उसने  राम के लिए वनवास माँगा ताकि उसका पुत्र राजा बन सके, वहीं ये भी कहा जा सकता कि इस घटनाक्रम की जड़ कौशल्या, दशरथ और कैकेयी के आपसी रिश्ते की छिपी हुई परतों में मिलता है। इन तीनों के स्वभाव की विशेषताओं के चलते ये त्रासदी टाली नहीं जा सकी। यही हम हमारी कहानियों में ढूंढते हैं – आने वाले नाटकीय घटनाक्रम की ऐसी आहट जिसमें किरदार का मानवीय स्वभाव ही उसकी किस्मत बन जाती है।
 
6. रामा सीता रावण: एक शाश्वत त्रिभुज
(Rama, Sita, Raavana: The Eternal Triangle)   
 
रविवार, 9 अगस्त, दोपहर 12 बजे से दोपहर 2 बजे तक
 
बुद्धिमानों की सलाह के विपरीत, सीता के लिए रावण की अथक जुनूनी इच्छा के कारण महायुद्ध अपरिहार्य हो गया। इसी ने राम और सीता के रिश्ते पर भी प्रहार किया। इस त्रिभुज की रूपरेखा क्या है? रावण ने सीता पर बल प्रयोग नहीं किया, इससे हमें उसको बारे में क्या पता चलता है? और सीता के  राम के प्रति प्रेम के बारे में? ये महान प्रेमकथा, अंत में जाकर त्रासदी में क्यों ख़त्म होती है? इस शाश्वत त्रिभुज के तनाव से हमें किरदारों के स्वभावगत खामियों की ताकत से रिश्तों में पैदा होने वाली पीड़ा के बारे में क्या पता चलता है?
 
7. मिथक के रचनाकार के रूप में स्क्रीनराइटर: गहन कहानियों से समाज को समृद्ध करना    
(Screenwriter as Mythmaker: Enriching Society With Deep Stories)
 
शनिवार, 15 अगस्त, सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक
 
कहानियां और फिल्में, मानव परिस्थितियों के बारे में हमारी समझ को प्रभावित करती हैं। गहन अर्थों वाली कहानियां, हमारी प्रतिक्रियाओं और निर्णय को प्रभावित करने वाली हमारी अंदरूनी दुनिया के प्रति हमें जागरूक करती है। कहानियां लेखक की संवेदनशील ऑब्ज़र्वेशन की रचनात्मकता से पैदा होती हैं। मानवीय परिस्थितियों के लिए संवेदनशीलता और सच्चे आत्मनिरीक्षण से ऐसी फिल्में बनती हैं जिन्हें हम सालोंसाल नहीं भुला पातें और जब भी उनके बारे में सोचते हैं द्रवित हो जाते हैं। दूसरे शब्दों में -हम भी मिथक रच सकते हैं।
 
 
वैध सदस्यता वाले SWA सदस्यों के लिए शुल्क: INR 5000/- (जीएसटी सहित)
 
 
नॉन – मेम्बर्स के लिए शुल्क: INR 6000/- (जीएसटी सहित)
 
(प्रत्येक सैशन के लिये: INR 1150/- वैध सदस्यता वाले SWA सदस्यों के लिए, INR 1300/- ग़ैर-सदस्यों के लिए)
 
अधिक जानकारी के लिए ईमेल करें: kanchi.parikh@whistlingwoods.net
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