Monthly Archives: December 2018

Attention, all SWA members! सभी एसडबल्यूए सदस्य, कृपया ध्यान दें!

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Dear Writer-Member.

Greetings from SWA!

Recently, we have noticed some rather silly rumours floating around, spread with the clear intention of spreading some lies about your Association. This is not a new phenomenon. In fact, every time a person or an organisation tries to do good work, there will always be envious people trying to discredit them.

However, we don’t want you to be anxious or concerned about any of this. So, to clear the air, here are the facts:

  1. It was SWA that informed the Federation (FWICE), in early 2018, that it has chosen to disaffiliate itself. While we have always respected the Federation, and continue to do so, we feel that since it is responsible for more than 2 lakh workers in our industry, its energies should focus on their issues, which are very important and urgent. It is unfair of unions like SWA, which represent professionals, to push their agenda as a priority on FWICE. That will just dilute FWICE’s efforts towards those workers.

Hence, with a very courteous letter, we informed them that we will not be the Federation’s affiliates, but will continue to work in parallel with them. Moreover, whenever there is a struggle for justice that concerns the entire industry, we shall most certainly stand shoulder-to-shoulder with the Federation, strongly.

So don’t pay any heed to the rumours that the Federation has disaffiliated us. In fact, you may be aware that the union of actors – CINTAA – too has disaffiliated from FWICE.

  1. Another silly rumour being spread is that after SWA’s disaffiliation from FWICE, its members cannot work in the Film and TV industry. This is patently false and mischievous. Do know that no person or union can stop you from working here.

Actually, after the strike of 2015, some producers had filed a complaint with the Competition Commission of India (CCI) urging it to stop the practice that only union members affiliated to the Federation can work in the film and TV industries. The CCI in its order termed this practice as monopolistic declaring it illegal, and threatened very strict action if any individual, regardless of her/his affiliation or membership is stopped from working in this industry. 

  1. Friends, SWA is a strong union that was established in 1954, by stalwarts like Ramanand Sagar, Khwaja Ahmad Abbas, Shailendra, Sahir Ludhianvi, Majrooh Sultanpuri and Kamal Amrohi. It continues to gain strength. On the legal front, your Association has a full-time copyright lawyer as its Legal Officer to offer free legal advice and guidance to all members for their contracts and complaints. Moreover, the Dispute Settlement Committee (DSC) continues to vigorously take up all genuine complaints by our members. 

A new and truly wonderful development is that SWA will soon offer legal support too to those members who may need to approach the court, after the DSC has decided in their favour. The detailed guidelines for the same are being worked out, which we shall announce very soon. This will give more concrete power to aggrieved members to seek justice legally.

  1. SWA has been organizing regular activities and events like Workshops, Conferences, Seminars, Vartaalaaps, other interesting events and initiatives to educate and enlighten our members. Our collaboration with worthy organisations for Contests, Pitching Programmes, LitFests, Fellowships, Scholarships will continue in higher gears. 

All in all, please be assured that SWA continues its efforts for you vigorously, as a proactive and vigilant union. So, please dismiss any silly rumours from any individual or organisation that seeks to mislead you about SWA. And, if you have any questions or doubts, at any time, about anything, please reach out to us by dropping an email or visiting our office. We shall promptly clear the air for you.

We believe that those people spreading rumours about SWA have formed a parallel association and are exhorting writers to join that. It is of course your democratic right to join any association that you believe is good for you. However, do know that, as per SWA’s constitution, our members cannot simultaneously belong to any other writers’ association.

With you, for you, always –

On behalf of the Executive Committee of SWA,

Sunil Salgia (Hon. Gen. Secretary)

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आपकी अपनी मज़बूत संस्था एसडबल्यूए (SWA) की ओर से एक ख़ास संदेश

प्रिय लेखक साथी!

नमस्कार! 

इन दिनों ये देखा गया है कि हमारे एसोसिएशन के बारे में कुछ अफ़वाहें और झूठी बातें फैलायी जा रही हैं। हालाँकि, ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। जब भी हमने कुछ अच्छा काम किया है, कुछ ईर्ष्यालु लोगों ने हमारे खिलाफ झूठी बातें फैलाने का काम किया है। 

आप किसी अफ़वाह या किसी की दुर्भावना का शिकार न हों, इसलिए ज़रूरी है कि आप अपने एसोसिएशन के क्रियाकलापों के बारे में सच जानें।

  1. सबसे पहले तो जानना ज़रूरी है कि साल 2018 की शुरुआत में हमने ख़ुद फेडरेशन (FWICE) से अलग होने का फ़ैसला लिया था। हालाँकि, अलग होने का अर्थ यह कतई नहीं है कि हम फेडरेशन के औचित्य को नकार रहे हैं। सच यह है कि फेडरेशन की ऑफ़िशियल भूमिका को लेकर हमारे मन में सम्मान है, और जब कभी ऐसा ज़रूरी लगा कि फिल्म इंडस्ट्री के हितों की रक्षा के लिए बाकी एसोसिएशनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलना आवश्यक है, तो हम फेडरेशन के साथ खड़े होने में तनिक देर नहीं लगायेंगे। 

साथियों, फिल्म इंडस्ट्री में 2 लाख से अधिक वर्कर्स हैं, जिनमें स्पॉट बॉय से लेकर, जूनियर आर्टिस्ट, ग्रुप डांसर, लाइटमैन, महिला कलाकार, आर्ट डिपार्टमेंट के वर्कर, ड्रेसमैन, हेयर ड्रेसर्स और मेकअपमैन शामिल हैं। उनके अधिकारों और हितों की रक्षा सबसे ज़रूरी और सबसे ऊपर है। ऐसे में यह अनुचित हो जाता है कि हम फेडरेशन को उस लड़ाई से हटाकर पहले राइटर्स के हित और हक़ के लिए सोचने और लड़ने को मजबूर करें। ऐसा करने से निश्चित तौर पर फेडरेशन का फ़ोकस शिफ्ट होगा और मजदूरों के हकों और हितों की लड़ाई कमजोर पड़ेगी। 

यही सब सोचकर हमने फेडरेशन को पूरी विनम्रता के साथ उनसे ख़ुद के अलग होने का पत्र लिखा कि हम भले ही आज अलग हो रहे हैं, लेकिन जब कभी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े मसलों पर न्याय की लड़ाई में हमारे साथ आने की आवश्यकता पड़ेगी, हम बिना एक पल की भी देर लगाए साथ आ खड़े होंगे। अतः झूठी अफ़वाहों पर ध्यान ना दें कि फेडरेशन नेहमें निकाला है। बल्कि शायद आपको पता हो कि कलाकारों का यूनियन सिंटा (CINTAA) भी फेडरेशन से अलग हो चुका है। 

  1. दूसरा मुद्दा यह है कि ऐसी भी खबरें भी फैलाई जा रही हैं कि स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन चूँकि फेडरेशन से अलग हो चुका है, इसलिए हमारे सदस्य फिल्म-टीवी इंडस्ट्री में काम नहीं कर सकेंगे। साथियों, यह पूरी तरह ग़लत और दुर्भावनाओं से भरा है। आप आश्वस्त रहें कि कोई भी व्यक्ति या यूनियन आपको फिल्म-टीवी इंडस्ट्री में काम करने से नहीं रोक सकता।

असल में, 2015 में फेडरेशन द्वारा बुलाई गयी हड़ताल के बाद कुछ प्रोड्यूसरों ने कम्पटीशन कमीशन ऑफ़ इंडिया (CCI) से गुहार लगाई थी कि फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में सिर्फ फेडरेशन से संबद्ध यूनियनों से जुड़े सदस्यों के ही काम करने की प्रथा पर रोक लगाई जाए। तब सीसीआई ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि अगर कोई यूनियन या फेडरेशन किसी भी व्यक्ति को, जो किसी यूनियन का मेंबर नहीं है, काम करने से रोकता है तो उस यूनियन या/और फेडरेशन के ख़िलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी।

  1. साथियों, एसडबल्यूए 1954 में रामानन्द सागर, ख्वाजा अहमद अब्बास, शैलेंद्र, साहिर लुधियानवी, मजरूह सुल्तानपुरी, कमाल अमरोही जैसी दिग्गज शख़्सियतों द्वारा स्थापित एक मज़बूत यूनियन है, और पिछले इतने सालों से हम निरंतर और मज़बूत होते जा रहे हैं। क़ानूनी मोर्चे की ही बात करें, तो अपने सदस्यों की शिकायतों और कॉन्ट्रैक्ट पर मुफ्त सलाह और गाइडेंस के लिए आपके एसोसिएशन ने कॉपीराइट के एक जानकार वकील को फुल टाइम के लिए नियुक्त कर रखा है।

एक और जो ऐतिहासिक क़दम हम उठाने जा रहे हैं, वो ये है कि एसडबल्यूए बहुत जल्द अपने उन सदस्यों को क़ानूनी सहायता देने की स्थिति में होगा, जिनके मामलों पर कोर्ट जाने के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं रह जाता है। हम इस नयी योजना पर काम कर रहे हैं और बहुत जल्द इस बाबत आपको सूचित करेंगे। निश्चित तौर पर हमारा यह क़दम न्याय पाने की दिशा में बेहद मज़बूत और महत्वपूर्ण होगा!

  1. आपका एसोसिएशन नियमित रूप से अपने नए–पुराने सदस्यों को लेखन के स्तर पर और सशक्त बनाने के लिए वर्कशॉप, कांफ्रेंस, सेमिनार, वार्तालाप आदि  जैसे ज़रूरी और दिलचस्प कार्यक्रम नियमित तौर पर आयोजित कर रहा है। साथ ही, प्रतिष्ठित और योग्य संगठनों, जैसे विस्लिंगवुड्स इंटरनैशनल, सिनेस्तान, MPA-APSA आदि के साथ मिलकर हम स्क्रिप्ट प्रतियोगिता, पिचिंग कार्यक्रम, फ़ैलोशिप, स्कॉलरशिप और साहित्य मेला आदि जैसे कार्यक्रम भी पूरे उत्साह के साथ आयोजित कर रहे हैं, ताकि प्रतिभावान लेखकों को काम और प्रोत्साहन के सुनहरे अवसर मिल सके।

कुल मिलाकर यह है कि आप अपने एसोसिएशन पर विश्वास रखें कि आपका एसोसिएशन (SWA) आपके हितों और अधिकारों को लेकर पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति या संगठन एसडबल्यूए को लेकर आपको गुमराह करने की कोशिश करता है, तो बिना देर लगाए उसे नकार दिया करें! और अगर आपके मन में किसी अफवाह की वजह से किसी प्रकार का संदेह प्रकट हो जाए, तो तुरंत ऑफिस आकर हमें संपर्क करें या ईमेल लिखें।

हम यह जानते हैं कि जो लोग एसडबल्यूए के बारे में अफवाहें फैला रहे हैं, उन्होंने हमारे समानांतर एक एसोसिएशन भी बनाया है और ख़ास मकसद के तहत दुर्भावनाओं से ग्रस्त होकर यह कार्य कर रहे हैं। आपके हित कहाँ और किसके साथ सुरक्षित हैं, ये आपसे बेहतर कोई और नहीं जान सकता। हाँ, बस इतना ध्यान रहे कि एसडबल्यूए के संविधान के अनुसार आप किसी दूसरे समानांतर राइटर्स एसोसिएशन की सदस्यता नहीं रख सकते।

हमेशा आपके लिए, आपके साथ –

स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन की कार्यकारिणी समिति की तरफ से,

सुनील सालगिया (मानद महासचिव)