Monthly Archives: February 2017

SWA partners with FICCI Frames to organise Frame Your Idea 2017

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So many talented writers face the frustration of not being able to meet with producers to show them the good stories/scripts that they have written. Well, here’s an opportunity where you can do so. Frame your Idea is back with its 3rd edition along with FICCI Frames 2017. And, this time SWA is its initiative partner.

If you have a developed idea or a written-out story or script (for cinema, or TV, or Digital platforms or even for a documentary) then you can take advantage of ‘Frame Your Idea’ and present it to producers. 

Do visit to learn more and register ASAP, and give your preferences for which producers you would like to meet from the list on the website. FYI will try to accommodate as many of your choices as possible. But, do hurry – it’s on a first-come-first-served basis. 

For any specific queries please mail

Note: After two years of FYI, producers have requested that the submitted stories be screened to ensure some minimum quality and coherence, by a panel of writers. SWA has agreed to take on that responsibility.

Also, to help you pitch your work in the window of time available at FYI, SWA has organised a ‘Pitching Workshop’ on March 20th 2017. Details will be sent to the selected participants.

We encourage you to apply for FYI with your wonderful stories/scripts and pitch them sharply to ensure a good chance at them being made.

Please see the following FAQs before applying:




An initiative founded by FICCI. Here, anyone with a content idea or story or screenplay for a film/ TV/ Digital Web series/show/ Animation/ Documentary can register, turn up and pitch it within 10 minutes, to the right people in the business. If one has finished content that can be pitched too.

This year’s edition is also empowered by the Screenwriters Association, Mumbai.


Anurag Kashyap’s next (unannounced) is a script written by journalist turned writer Nihit Bhave which Phantom Films found at FYI 2015.

Rakyesh Omprakash Mehra’s ROMP & Disney India found scripts, at FYI 2015.

Eros Trinity pictures found writers to hire for its Writers’ Room at FYI 2016.


  1. Film
  2. TV
  3. Digital/web series
  4. Animation
  5. Documentary
  6. Finished Content


FYI lists commissioners/broadcasters/producers on its webpage and calls for entries. The link for that webpage is

Applicants who register, provide their producer preference list and get allotted meetings by an automated system on a first-come-first-served basis. 

On the day of the event, participants are handed a schedule sheet for their meetings based on which they meet the producers for 10 minutes each; that they have opted for during registration.


When an applicant registers he gets a minimum of 4 meetings with the producers of his preference. Each meeting is for 10 minutes.


A panel nominated by FICCI & SWA (Screenwriters Association, Mumbai) to screen applications. This improves the value to both producers and participants.

A free pitching workshop for the selected participants to be conducted by SWA on 20 th March 2017. Details of the same will be emailed to the selected participants.


Cost of registration is Rs. 5000 + service tax (for a pack of min 4 meetings).

One can buy up to 6 packs (24 meetings). However, if the SWA & FICCI screening panel rejects the application, a full refund will be provided to applicant by 7th April 2017.


There is no limit to the number of concepts one can pitch as long as it is within 10 minutes.


Last date for entries is March 15th 2017. But since it’s on a first-come-first-served basis, the earlier one registers the better chance of getting meetings with one’s preferred producers.


Participants will receive their meeting details via email by 18th March 2017. 


  • ‪March 21st  – Film + Animation ‬
  • March 22nd  – Film + Digital/Web + Finished content
  • March 23rd  – Film + TV + Documentary

VENUE & TIMINGS: Renaissance, Powai, Mumbai, 10 am – ‪6 pm‬.


The following panelists in the following categories:


  1. Balaji
  2. Cinestaan
  3. Dharma
  4. Drishyam
  5. Emmay
  6. Encyclomedia (Marathi)
  7. Film Karavan
  8. Fox Star Studios
  9. JA Entertainment
  10. Kabir Khan Films
  11. Macguffin
  12. Parin Multimedia
  13. Rajshri Productions
  14. Romp
  15. RK films (Sidharth Roy Kapur)
  16. RSVP (Ronnie Screwvala)
  17. Shashi Sumeet
  18. Sikhya
  19. Shemaroo
  20. Tips
  21. Eros Trinity
  22. Vishesh Films
  23. Viacom
  24. Vijayanthi (Telegu)
  25. Wiz Films (Wizcraft)
  26. Y Films (Yashraj Films)


  1. Beyond Dreams
  2. Bodhi Tree Multimedia
  3. Cinestaan
  4. Dharma
  5. Emmay
  6. Eros Now
  7. Film Karavan
  8. Kabir Khan Films
  9. Rajshri
  10. Shashi Sumeet
  11. Star Network Pictures
  12. Sony Liv
  13. Tips
  14. Vishesh
  15. Wiz films (Wizcraft)


  1. Beyond Dreams
  2. Bodhi Tree Multimedia
  3. Emmay Entertainment
  4. Mumtaz Saba Productions
  5. Parin Multimedia
  6. Rajshri Productions
  7. Shashi Sumeet
  8. Swastik
  9. Shemaroo
  10. Star Network
  11. Shakuntalam Telefilms
  12. Vishesh
  13. Wiz TV (Wizcraft)


  1. Eros Now
  2. Macguffin
  3. Sony Liv
  4. Sikhya
  5. Shemaroo
  6. Viacom18
  7. Vishesh Films


  1. Animax Sony
  2. Beyond Dreams
  3. Bioscopewala
  4. Greengold Animation
  5. One Life Studios
  6. Shemaroo
  7. Screenyug
  8. Trinity Eros


  1. Cinestaan
  2. Eros Now
  3. Film Karavan
  4. History
  5. Nat Geo (to be confirmed)
  6. Sony Liv

स्क्रीनराइटर्स असोसिएशन के सेमिनार में लिखी गई भोजपुरी फिल्मों के बदलाव की कहानी!

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“भोजपुरी बेहद मीठी भाषा है. देश के बड़े बड़े साहित्यकारों और क्रांतिकारियों की भाषा है, लेकिन ऐसी महान भाषा का सिनेमा इतनी बुरी हालत में है ये सोचकर भी शर्म आती है.”

यह कहना था हिन्दी फिल्मों के प्रख्यात लेखक कमलेश पांडे का. वह स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘भोजपुरी सिनेमा : कल, आज और कल’ में बतौर अतिथि बोल रहे थे. कमलेश पांडे खुद भी भोजपुरी भाषी हैं.

अंधेरी पश्चिम के भक्तिवेदांत स्कूल ऑडिटोरियम में आयोजित प्रोग्राम में भोजपुरी सिनेमा के मौजूदा हालात और भविष्य की संभावनाओं को लेकर स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन ने चर्चा आयोजित की थी. चर्चा दो सत्रों में हुई. पहले सत्र में भोजपुरी फिल्मों की स्क्रिप्ट को लेकर बात हुई, जबकि दूसरे सत्र में भोजपुरी फिल्मों के गीतों पर बहस हुई.

पहले सत्र में लेखक जीतेन्द्र सुमन, निर्माता–वितरक अभय सिन्हा, अभिनेता कुणाल सिंह, अभिनेत्री स्वीटी छाबड़ा और लेखक-निर्देशक मंजुल ठाकुर पैनलिस्ट थें. जबकि मॉडरेटर थे भोजपुरी फिल्मों के लेखक धनंजय कुमार. इस सत्र में भोजपुरी फिल्मों की स्क्रिप्ट की कमजोरी पर बात हुई. निर्देशक मंजुल ठाकुर ने जहाँ अच्छे स्क्रिप्ट राइटर के न होने की बात उठाई, वहीं राइटर जीतेन्द्र सुमन का कहना था कि अच्छे स्क्रिप्ट राइटर्स तक लोग पहुँचते ही नहीं, क्योंकि उन्हें कम पैसे में राइटर चाहिए. जबकि निर्माता अभय सिन्हा का कहना था कि राइटर्स को हमने पाँच पाँच लाख तक पेमेंट किया है, लेकिन अच्छी भोजपुरी फिल्में चल नहीं पातीं. तो अभिनेता कुणाल सिंह और हीरोइन स्वीटी छाबड़ा का कहना था कि राइटर के यहाँ से चली स्क्रिप्ट सेट पर आर्टिस्ट तक आते आते काफी बदल जाती है.

कई भोजपुरी फिल्मों में हीरोइन रहीं स्वीटी छाबड़ा ने यह भी स्वीकार किया कि भोजपुरी फिल्मों की हीरोइन के तौर पर खुद का परिचय देते वक्त परिवारों में कई बार झेंप सी होती है. वहीं अभय सिन्हा ने कहा कि जो रेगुलर प्रोड्यूसर फिल्में बना रहे हैं, उनकी फिल्मों में फूहड़ता नहीं होती. लेकिन ढेर सारे नये प्रोड्यूसर भी फिल्में बनाने आते हैं, उनकी फिल्मों की वजह से हम सब भी बदनाम हो जाते हैं. इस सत्र की पूरी चर्चा में यह बात उभर कर आई प्रोड्यूसर्स चूँकि स्क्रिप्ट राइटर पर अपने बजट से नहीं के बराबर राशि खर्च करना चाहते हैं, इसलिए अच्छे स्किल्ड स्क्रिप्ट राइटर भोजपुरी फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट नहीं लिखते, इसलिए स्तरीय और अच्छी फिल्में नहीं बन पातीं.

दूसरे सत्र में गीतों को लेकर चर्चा हुई. इस सत्र में पैनलिस्ट के तौर पर गीतकार समीर, लोकगीत गायिका शैलेश श्रीवास्तव, निर्देशक सुनील प्रसाद, राजकुमार पांडे, वर्ल्ड वाइड रिकॉर्ड्स के मालिक रत्नाकर और उत्तरप्रदेश फिल्म विकास परिषद के वाइस प्रेसिडेंट गौरव द्विवेदी शामिल हुए. मॉडरेटर थे धनंजय कुमार.

इस सत्र में राजकुमार पांडे और म्यूजिक कम्पनी मालिक को जहाँ डबल मीनिंग गानों के लिए कटघरे में खड़ा किया गया, वहीं समीर ने कहा कि अब यह दौर भी अपने आखिरी चरण में हैं. जितनी नंगई भोजपुरी फिल्मों में है, उसके आगे अब कोई शब्द नहीं बचे. अगर यह ट्रेंड नहीं बदला तो भोजपुरी फिल्में एक बार फिर बंद होने की स्थिति में पहुँच जायेंगी. सुनील प्रसाद और शैलेश श्रीवास्तव ने भोजपुरी लोकगीतों की मिठास और पुरानी फिल्मों के गानों की कर्णप्रियता को याद किया तो, रत्नाकर का कहना था बुरे गानों का दौर खात्मे की ओर है और वह अपनी कम्पनी से ऎसे गाने रिलीज नहीं करते. अभिनेत्री स्वीटी छाबड़ा का कहना था कि उन्होंने कभी वल्गर गानों पर काम करना स्वीकार नहीं किया. इस स्थिति से उबरने में उत्तरप्रदेश फिल्म विकास किस तरह अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सकता है, इस पर अपनी बात रखते हुए वाइस प्रेसिडेंट ने कहा कि अच्छी फिल्म बने इसके लिए उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद वचनबद्ध है और हम हर सम्भव मदद को तैयार हैं.

प्रोग्राम की शुरुआत स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन द्वारा भोजपुरी फिल्मों के अब तक के सफर पर बनाई गई डॉक्यूमेंटरी फिल्म के प्रदर्शन से हुई. डॉक्यूमेंटरी फिल्म की संकल्पना और स्क्रिप्ट धनंजय कुमार की थी, जबकि निर्देशन किया था सुनील प्रसाद ने.

उसके बाद एसोसिएशन के महासचिव ज़मा हबीब ने राइटर्स एसोसिएशन के द्वारा इस तरह के प्रोग्राम के पीछे के मकसद को सामने रखा और भोजपुरी फिल्मों के गानों से जुड़ी अपनी पसंद–नापसंद की चर्चा की. महासचिव के वक्तव्य के बाद एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट और इवेंट सब-कमिटी के चेयरमैन दानिश जावेद ने आज के कार्यक्रम के बारे में संक्षिप्त परिचय दिया. प्रोग्राम के उद्घोषक थे सुधाकर स्नेह. इस अवसर पर हिन्दी के प्रख्यात लेखक अंजुम रजाबली, विनय शुक्ला, जलीस शरवानी, टेलीविजन सीरियल लेखक राजेश दुबे, सुनील साल्गिया, शांति भूषण, मनोज हंसराज, के मनोज सिंह और अमित झा सहित ढाई सौ से अधिक भोजपुरी सिनेमा से जुड़े लेखक, निर्देशक और भोजपुरी भाषा प्रेमी उपस्थित थे.

समारोह का फ़ोटो एल्बम देखने के लिए क्लिक करें:

देखें, समारोह में दिखायी गयी डॉक्यूमेंट्री ‘भोजपुरी सिनेमा: कल आज और कल’ – 






Whistling Woods International & Screenwriters Association



By Anjum Rajabali  

With – Jaideep Sahni (Chak De India)  Shakun Batra (Kapoor & Sons)

Nitesh Tiwari (Dangal) (TBC)   Gauri Shinde (Dear Zindagi)

Juhi Chaturvedi (Piku)  Ashwiny Iyer Tiwari (Nil Battey Sannata)

Sriram Raghavan (Badlapur) Shridhar Raghavan (Dum Maro Dum)

Nikhil Mehrotra (Dangal) Shreyas Jain (Dangal)

March 1-5, 2017   |   At Whistling Woods International, Mumbai.

2016 can be called the year of the Indian screenwriter! With a slew of films powered by some scintillating scripts blazing new trails, the scramble for good scripts gets a shot in the arm. Writers’ visions seem to be driving storytelling in the Hindi film industry.

Those who were part of this trail-blazing year are happy to share their knowledge, experience and guidance, via interactive masterclasses in the workshop!

With the aid of new examples, references and illustrations, the Workshop Instructor will cover all the useful principles of screenwriting, the navrasa theory, Indian mythology, copyright law, writers’ contracts, and offer professional guidance.


Anjum Rajabali

Anjum Rajabali

Anjum Rajabali (Drohkaal, Ghulam, The Legend of Bhagat Singh, Raajneeti): Head of Screenwriting at Whistling Woods, erstwhile honorary head of Screenplay Writing at FTII, and an activist of SWA. Conducts workshops, script labs, seminars and fellowships for screenwriters in India and abroad.

FEE: For SWA members: Rs. 8500/- (Inclusive of taxes, tea/coffee and lunch on all days) For non-SWA members: Rs. 11000/- (Inclusive of taxes, tea/coffee and lunch on all days)

*If you wish to become an SWA member, please visit

Facebook Event Page:  

For more information and to register for the workshop, please call 30916003 or email:


SWA stands in solidarity with Writers Guilds of America (West and East)

The Screenwriters Association (SWA) of India expresses its shock and outrage at the recent policy announcement by the new President of America, imposing barriers on the entry of people from other countries, which is clearly a thinly disguised ‘Anti-Muslim’ ban. Discriminating against people on the basis of the country, religion or region that they were born into amounts to a violation of their natural freedom of movement and hence of their human rights.

Such xenophobic policies create and reinforce suspicion and hate among peoples, thereby legitimating prejudice and even inciting violence by demonizing certain communities and nationalities.

SWA stands in solidarity with their brother unions – the Writers Guilds of America (West and East) and their screenwriting members – which have issued the following statement protesting and opposing the ban policies:



Writers Guilds America (East & WesT)

Writers Guilds Statement on Muslim Ban;     

Solidarity with Iranian Filmmaker Asghar Farhadi

New York and Los Angeles (January 29, 2017)

The following is a joint statement from Michael Winship, President, Writers Guild of America East (WGAE), and Howard A. Rodman, President, Writers Guild of America West (WGAW):

“It is both unconstitutional and deeply wrong to say that you cannot enter our country because of where you were born or what religion you were born into.  The Writers Guilds of America, East and West condemn Donald Trump’s profoundly un-American “Muslim ban,” and applaud the Federal Court’s decision to grant a stay that will keep those being held at American airports from being forcibly returned to their countries.  Human rights – including the freedoms of speech and religion – are essential to all Americans and to all who come here to build better lives.

“We are especially troubled by reports that Asghar Farhadi, director of THE SALESMAN, which won Best Screenplay at Cannes and is now nominated for an Oscar, may together with his cast and crew be prevented from entering our country.  From its early days, the entertainment industry has been built by the imagination of immigrants.  Our guilds are unions of storytellers who have always welcomed those from other nations, and of varying beliefs, who wish to share their creativity with America.  We are grateful to them, we stand with them, we will fight for them.”

(For more information on the Writers Guild of America, East, visit     For more information on the Writers Guild of America, West, visit