Monthly Archives: November 2016

दो किनारों की दास्ताँ (कविता) – आशुतोष तिवारी

दो किनारों की दास्ताँ

सुनो, तुम्हे दो किनारो की, एक दास्ताँ सुनाता हूँ।

उम्र से पहले जो ढल गया, किस्सों से भी आगे निकल गया

तेज ख़ामोशी का दरिया, जिन दो किनारों को निगल गया।

एक किनारा, आज नदी के बीच से, चुपचाप पुकारता हैं।

नम रेतों के फासले पर, दूसरा, बिना सुने मुस्कराता है।

वही एक, चांदनी रात में, चाँद को अपने हाथो से नहलाता है,

एक लहर पर परछाई रख, तारो में लिपटा चाँद बढ़ाता है।

शायद उस चाँद को देख दूसरे की चंचलता वापस आ जाए,

उलझती बुनती कहानियों में, कोई शब्द, होठो पर आ जाए।

बुझी हँसी भी पूरी नहीं होती, कोई कश्ती सतह से गुजर जाती है,

मोतियाँ गोद में छुपा लेती है, पर एक सीप, उस एक को मिल जाती है।

कई सालो का इतिहास, एक पल मे, गुज़रे पल का हो जाता है,

अचानक तूफ़ान, शांत नदी के, सीने से उबल पड़ता है

दूर थे पर एक रिश्ता तो था, यही आज किनारों को बतलाता है,

दर्द फासले का नहीं, गुमनामी का है, अपनी जिंदगी सुनाता है।

कल रात डूबते वक़्त मिल गया था, वहीँ किनारा मुझको,

अपने हाथो की उँगलियों से, दोनों को मिलाने की कोशिश करता हूँ।

सुनो, तुम्हे दो किनारो की एक दास्ताँ सुनाता हूँ।

आशुतोष तिवारी
ashu774@gmail.com

 

मंथन (कविता) – चन्दन कुमार मिश्रा

(मंथन)
दर दर मैं यूँ फिरता हूँ
गिरके फिर सम्भलता हूँ
किसी के उठाने की मैं क्यों आस करूँ
समझ में नहीं आता किस पे विश्वास करूँ।

कोई कहता हम हिन्दू हैं
कोई कहता है हम मुस्लिम हैं
समझ नहीं आता
क़ुरान की तालीम लूँ या
गीता का पाठ करूँ ।
समझ नहीं आता किसपे विश्वास करूँ ।।

किसे पता की मैंने बचपन को खोया
बिना राम बिना रहीम के मैं कितना रोया
वो कह रहें की भुला दो उन यादों को
जला दो इन्हें नफरत की ज्वालामुखी में
समझ नहीं आता
कहाँ से मैं प्रयास करूँ
समझ नहीं आता किस पे विश्वास करूँ ।।

अँधेरा ही अँधेरा है
जैसे लगता है यहाँ सिर्फ गिद्धों का बसेरा है
नोच रहे हैं एक दूसरे को
घोट रहें हैं गला एक दूसरे का।
खुली आँखों से देखकर भला कैसे मैं हर्षो उल्लास करूँ
समझ नहीं आता मैं किसपे विश्वास करूँ
समझ नहीं आता मैं किसपे विश्वास करूँ।।

Name: Chandan Kumar Mishra
Member Id: 32116

Contribution from: Chandan Kumar Mishra
Email: cm4091@gmail.com

फेलो और एसोसिएट मेंबर्स के लिए अपग्रेड की ज़रुरी सुचना

फेलो और एसोसिएट मेंबर के लिए जरूरी सूचना

SWA के संविधान में १७ जुलाई २०१६ को बुलाई गई एजीएम में कई संशोधन पास किए गये, उनमें से एक संशोधन यह है कि फेलो और एसोसिएट मेंबर को तीन साल के दौरान अपनी मेंबरशिप अपग्रेड करना अनिवार्य होगा। यानी फेलो मेंबर को एसोसिएट या रेगुलर मेंबर के तौर पर तथा एसोसिएट मेंबर को रेगुलर मेंबर के तौर पर अपनी मेंबरशिप अपग्रेड करवानी होगी।
संविधान की धारा 5 ब (2) और धारा 5 ब (3) के अनुसार अपग्रडेशन की सीमा मेंबर बनने की तारीख से तीन साल तक की है। इस समय सीमा के समाप्त होने से पहले यदि कोई सदस्य अपग्रेड होने की योग्यता हासिल नहीं कर पाता है या योग्यता होने के बाद भी मेंबरशिप अपग्रेड नहीं करा पाता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो जायेगी। सदस्यता समाप्त हो जाने की स्थिति में यदि वह अपनी सदस्यता वापस चाहता है, तो उसे फिर से मेंबरशिप फॉर्म भरना होगा और उल्लिखित फीस भरनी होगी।
यह नियम चूँकि जुलाई 2016 को पास किया गया है, इसलिए इस तारीख से पहले मेंबरशिप लेनेवाले सभी मेंबर्स के लिए अपग्रेडशन की समय सीमा 15 अक्तूबर  2019 तय की गयी है।
इसलिए आप सभी सदस्यों से यह अपील है कि यदि आप फेलो या एसोसिएट मेंबर हैं, तो 15 अक्तूबर 2019 से पहले अपनी सदस्यता अपग्रेड करवा लें।

महासचिव
स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन

Important Notice for Fellow & Associate Members

हिंदी में जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें.

According to the new amendment passed on 17 July 2016, Clauses 5 b (ii) and 5 b (iii) of the SWA Constitution have been upgraded. Now it is mandatory for the Fellow members and Associate Members to upgrade their membership within 3 years of becoming SWA Members. Associate Members must upgrade to Regular Members and Fellow Members can upgrade to Associate or Regular Member depending upon their eligibility. During this period if for any reason, a Fellow/Associate Member fails to upgrade, then his/her membership will lapse and s/he will need to apply afresh for new membership as per the eligibility at that time. To start with all Associate / Fellow Members will have to upgrade before 15th Oct 2019 which has been fixed as the Deadline.

 

 

पहचान … (ग़ज़ल) – UE विजय शर्मा

पहचान …

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खुदायी सा प्यारा साथ है यह साथ हमारा तुम्हारा

बन मुस्कान साथ चलता है यह साथ हमारा तुम्हारा

किसी मंज़िल की तलाश नही है मेरे मन को हमारी

राह-ए-ज़िन्दगी पर मेरी नजरों को तलाश रहेगी तुम्हारी

अरमान तो कभी भी ना थे मेरे ख्याली और आस्मानी

मन से मन की बाँध डोर तुझसे हुआ है इश्क रूमानी

तन से तन ना मिल पाए तो कभी शिकायत ना करना

अपने मन से मेरे मन की सोचों को कभी दूर ना करना

नही जानता क्या रिश्ता है रूह से रूह का मेरा तुम्हारा

जो भी है यह है पूरा जो दिखता अधूरा सा रिश्ता हमारा

तन के रिश्ते ना हमारे इश्क की कभी पहचान बनेंगे

कर रूहों का मिलन हम मोहब्बत की पहचान बनेंगे

…… यूई

Contribution from: UE Vijay Sharma
Email: cmd.nvm@gmail.com

इश्क़ मुबारक (गीत समीक्षा) – अमित कुमार तिवारी

गीत समीक्षाः  इश्क़ मुबारक (SONG REVIEW)
गीतकारः मनोज मुन्तशिर
संगीतकारः अंकित तिवारी
शैलीः मधुर गीत (MELODY SONG)
गायकः अरिजीत सिंह
फ़िल्मः तुम बिन 2

ON THE VIEW OF LYRICS-
गीतकार मनोज मुंतशिर ने इस प्रेम गीत को लिखा है, गीत में प्रेम के एहसास
और अभिव्यक्ति के सौन्दर्य को पंक्तिबद्ध किया गया है।

ON THE VIEW OF SINGING-
गायक अरिजित सिंह ने अलग तहज़ीब में गायन प्रस्तुत किया है, गीत संगीत
प्रेमियों द्वारा पसंद किया जा रहा है।

ON THE VIEW OF MUSIC COMPOSITION-

गीतकार अंकित तिवारी ने MELODY SONG में संगीत के नये आयाम दिये हैं,
संगीत में हरर्मोनियम, तबला,गिटार, ढ़ोलक का प्रयोग मंझे कलेवर के साथ
करना गीत को और भी मधुर बनाता है।

पूरा  गीत इस प्रकार हैः
इश्क़ मुबारक दर्द मुबारक इश्क़ मुबारक दर्द मुबारक
इश्क़ मुबारक दर्द मुबारक
तेरी बारिशें भिगायें मुझे
तेरी हवायें बहायें मुझे
पांवों तले मेरे ज़मीने चल पड़ीं
ऎसा तो कभी हुआ ही नहीं ईईई
ऐ मेरे दिल मुबारक हो यही तो प्यार हैऐऐ
ऐ मेरे दिल मुबारक हो यही तो प्यार हैऐऐऐ
इश्क़ मुबारक इश्क़ मुबारक दर्द मुबारक इश्क़ मुबारक
दर्द मुबारक इश्क़ मुबारक दर्द मुबारक
ऐसा लगता है क्यूं तेरी आंखें जैसे आंखो में मेरे रह गईं
कभी पहले मैनें न सुनी जो ऐसी बातें कह गईं
तू ही तू है जो हर तरफ मेरे तो तुझसे परे मैं जाऊं कहाँ
ऐ मेरे दिल मुबारक हो यही तो प्यार हैऐऐ
ऐ मेरे दिल मुबारक हो यही तो प्यार हैऐऐऐ
जहां पहले पहल तू आ मिला था
ठहरा हूं वहीं मैं अभी
तेरा दिल वो शहर है
जिस शहर से लौटा न मैं कभी
लापता सा मिल जाऊं कहीं तो
मुझसे भी मुझे मिला दे ज़रा
ऐ मेरे दिल मुबारक हो यही तो प्यार है
नि द पा नि द पा ग रे सा
नि द पा ग म गा रे सा
ऐ मेरे दिल मुबारक हो यही तो प्यार है
इश्क़ मुबारक दर्द मुबारक इश्क़ मुबारक दर्द मुबारक
इश्क़ मुबारक ईईईईईई इश्क़ मुबारक ।।
गीत समीक्षकः अमित कुमार तिवारी
SONG REVIEW BY AMIT KUMAR TIWARI
E MAIL- amitapkamitra@gmail.com
(उपरोक्त  गीत समीक्षा स्वतन्त्र गीत समीक्षक के तौर पर की गई है)

No ‘Re-Take’ Actor (कहानी) – Rajkumar Arya

No “Re-Take” Actor

यह कहानी एक ऐसे “एक्टर” की है जो सिर्फ फिल्मो का ही नहीं बल्कि अपनी वास्तविक जिंदगी का भी एक्टर था। जिसने फिल्मो के साथ साथ कभी अपनी जिंदगी में भी दोबारा कोई “रि-टेक” नहीं लिया। वह एक रियल लाइफ एक्टर था। शायद इसी वजह से सब उससे जलते थे। “रोश कुमार”….. बीते दिनों के एक मध्यमवर्गीय फिल्म राइटर “रोहन कुमार” व् एक ऐड मोडल “शना खन्ना” का बेटा था। जो मुंबई की एक आर्टिस्ट सोसाइटी में रहते थे। “रोश” के माँ बाप की एक दुसरे से मुलाक़ात एक अवार्ड शो के दौरान हुई और बाद में उन दोनो की मुलाक़ाते प्यार से लेकर शादी तक में तब्दील हुई। शायद कुदरत ने इन दोनों को मिलवाकर “परफेक्शन” की नयी परिभाषा लिखी। विज्ञान कहती है कि “हम जिस तरह की भी छवि और सोच अपने दिल और दिमाग में सोचते व् बनाते है वह शायद कही न कही हमारे DNA के जरिये हमारी आने वाली पीढ़ी में आ ही जाती है”। रोहन व् शना की शादी के बाद,इन दोनों ने भी अपनी होने वाली संतान(लड़का या लड़की) के बारे में भी कुछ न कुछ क्रिएटिव और लॉजिकल सोच ही रखा था। रोहन व् शना को लड़का पैदा हुआ और इन दोनों ने मिलकर अपने बेटे का नाम “रोश” रखा जो रोहन व् शना के पहले अक्षरों के मेल से बना है। रोहन और शना ने अपने होने वाले बच्चे के लिए जैसी भी छविया सोची व् समझी थी बिलकुल वैसी ही उनकी संतान पैदा हुई। “रोश” बिलकुल ही खुबसूरत पैदा हुआ था। रोहन और शना की पड़ोसन “मीरा राडिया” जो एक फिल्म मेंकर थी। उसने रोश को देखते ही अपने हाथो से कैमरे का एंगल बनाकर रोश के “एक्टर” बनने की भविष्यवाणी कर दी। फिर क्या,यह एंगल रोहन और शना के दिल और दिमाग में भी कन्फर्म हो गया कि उनका बेटा रोश एक एक्टर ही बनेगा। ( रोश की जिंदगी बढ़ने लगी और उसके साथ साथ उसकी सुन्दरता,अकल,शक्ति भी बढ़ने लगी। विकी उसका जिगरी दोस्त था। सोनिया उसकी गर्लफ्रेंड थी। रोश एक क्रिएटिव और इंटेलिजेंट लड़का था जिसका माथा हमेशा चढ़ा रहता था। वह बहुत ही क्रेजी,स्पोर्टी,नॉटी और पूरा थोटी था। उसे “एक्टर” वर्ड से चिड थी। वह एक बिजनेसमेन बनना चाहता था। वक़्त बढ़ा और फिर अचानक रोश की जिंदगी भी बदलने लगी। सबसे पहले सोनिया उसे छोड़कर चली गयी। फिर उसका उसका दोस्त विकी भी उसे छोड़कर चला गया। फिर उसकी जिंदगी में भूचाल सा आ गया। अचानक उसकी माँ के सीढ़ियो से नीचे गिरने की वजह से उसकी माँ कोमा में चली गयी। इलाज़ की वजह से उसके पापा की फाइनेंसियल कंडीशन भी बुरी हो गयी थी। क़र्ज़ ने उसके परिवार की मुश्किलें बढ़ा दी। रोश की काबिलियत भी उसके लिए एक श्राप सा बनने लगी थी। लेकिन वह डटा रहा क्युकी उसकी सोच पर कुछ फर्क नहीं पड़ा। वक़्त बढ़ा और वह “ठिकाना” पर जाने लगा। वहां रोश की मुलाक़ात “मोहित” से हुई। मोहित एक राइटर था और मोहित भी रोश की तरह हमारे देश का एक “फ्रसट्रेटेड टैलेंट” था जिसे दुनिया ने मौका देना उचित नहीं समझा था। और फिर एक दिन रोश की माँ भी गुजर गयी। रोश अपने पिता का क़र्ज़ उतारने के लिए न चाहते हुए मोहित के साथ एक्टिंग की दुनिया में आया। मोहित ने रोश कुमार के साथ ( “Professional Car Killer”, “The Reservation”, “The Bacteria, “Illegal Good Man”, “The Logical Baba”) जैसी कई लाजवाब फिल्मो का निर्माण किया। मोहित की फिल्मो के अन्दर रोश कुमार की जबरदस्त एक्टिंग देखकर पूरी दुनिया रोश कुमार की फेन बन गयी। पूरी दुनिया ने उसे “no re-take Actor” का लेबल दे दिया। पूरी दुनिया में उसके 120 करोड़ लोग चाहने वाले थे। वह दुनिया का सबसे परफेक्ट एक्टर था। सोहरत,दौलत उसके कदम चूमती थी। उसने अपने पार्टनर मोहित के साथ मिलकर “क्रिएटिव शिवा फिल्म्स” नाम के फिल्म प्रोडक्शन हाउस का निर्माण करके दुनिया के हर असली आर्टिस्ट को खुद जाकर खोज लाकर मौका देना शुरू कर दिया। रोश कुमार ने “लॉजिक” नाम की NGO का गठन करके अनाथो,लावारिशो और बेसहारा बच्चो को जबरदस्ती अपनी NGO में पकड़ लाकर उन बच्चो को उनके काबिल होने तक फ्री शिक्षा,कपडा,रहना देने का काम शुरू किया। फिर तो रोश कुमार की जिंदगी गुमें सब बदलने लगा। जैसे जैसे उसकी उम्र बढ़ने लगी वैसे वैसे उसका बीता हुआ अच्छा वक़्त दोबारा उसका फ्यूचर बनकर उसके सामने आने लगा। उसका दोस्त विकी उसकी जिंदगी में फिर लौट आया। फिर उसकी डार्लिंग “सोनिया” भी लौट आई। रोश की जिंदगी में सब कुछ अच्छा हो गया। फिल्म लाइन को अपने 20 अहम् साल देने के बाद उसने वो शुरू किया जो वह बचपन से करना चाहता था। उसने इस दुनिया के हर क्रिएटिव आर्टिस्ट को मौका देने के लिए UN के समक्ष “सिनेमा” नाम का शहर बसाने की बात रखी। UN ने भी उसकी विचारधारा से सहमत हो कर इंडिया में 50 हज़ार करोड़ रूपए की लागत से आर्टिस्टस की असली दुनिया “सिनेमा” शहर का निर्माण करवाया। और फिर एक दिन अचानक फिर उस एक्टर की जिंदगी में सब कुछ बदल गया। उसके साथ एक हादसा हो गया। अचानक उसकी कार फुटपाथ पर चढ़ गयी। तीन बच्चो के सिर उसकी गाडी के नीचे कुचले गए। ) इसके बाद “नो रि-टेक एक्टर” “रोश कुमार” ने कभी भी जीवन में पीछे मुड़कर नहीं देखा। शायद यह रोश का आखरी दिन था इसके बाद रोश कुमार कभी भी किसी से नहीं मिला। सुना है कि रोश के जेल जाने के एक साल बाद उसके पापा भी गुजर गए। मोहित ने ही उसके पिता की चिता का दाह संस्कार किया। विकी भी एक बार उससे जेल में मिलने के लिए आया लेकिन वह उससे मिला ही नहीं। सोनिया आजतक रोश कुमार से मिलने नहीं आई। कभी कभी मोहित रोश से मिलने जेल में चला जाता है लेकिन वह हमेशा नम आँखे लेकर एक मायूसी के साथ वहा से खाली हाथ लौट आता है। पूरी दुनिया में रोश कुमार अपने 120 करोड़ चाहने वालो के लिए सिर्फ एक “याद बनकर ही रह गया”।

The End…

(The StoryTeller Is Director Mohit)

Contribution from: Rajkumar Arya
Email: vinaysharmaofficial1@gmail.com

ISC4 – Coffee Table Book – Index

ISC4 Coffee Table Book
Contents

ISC Mission & Objective About
Message from the President Message from the Gen Secretary
Message from the Convenor Message from the Jt Convenor
Message from the Co-Convenor Message from FSE, WGGB, WGA, IAWG
Organizing Committee Message from our Patrons
Message from Phantom Films Submit your Scripts to Fox Studios
3rd ISC A Reoprt – Kamlesh Pandey Film Writers Association The Golden Years – Kamlesh Pandey
Right to Write – Sauvik Bhadra Central Bored of Film Certification – Leela Samson
Sense & Censorship – Suchita Ranglani नए तेवर में है 21वी सदी का हिंदी सिनेमा – अजय ब्रम्हात्मज
Where are the Mango People – Sukanya Verma Thinking in English Speaking in Hindi – Tejaswini Ganti
Lyrics Aaj Kal – Kausar Munir हिन्दुस्तानी बोली के बहाने – संजय चौहान
Who’s that Girl? – Gajra Kottari कहानी और सिनेमा – अशोक मिश्र
Yadon ki Baraat – Kamlesh Pandey Main Pal Do Pal ka Shayar Hoon – Vinay Shukla
Yeh Jo Hai Zindagi – Kundan Shah Goldie Kamra No. 203 – Sriram Raghvan
Message from Farhan Akhtar Message from Anushka Motion Pictures