•  धनंजय कुमार
    •  19 August 2018
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    कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) की अहमियत

    स्क्रीनराइटर्स के क़ानूनी अधिकारों और SWA की DSC के कामकाज पर विशेष शृंखला - भाग 2

    सबसे पहले - कॉन्ट्रैक्ट! 

    काम शुरू करने से पहले प्रोड्यूसर से कहें कि पहले एग्रीमेंट बनाए !

    कहानी और स्क्रिप्ट आपने लिखी हो, लेकिन अगर एग्रीमेंट या कॉन्ट्रैक्ट सही नहीं है, तब भी कॉपीराइट से आपको हाथ धोना पड़ सकता है. और यह भी संभव है कि निर्माता फिल्म में आपका नाम भी न दें. इसलिए जरूरी है कि कहानी या स्क्रिप्ट लिखने से पहले प्रोड्यूसर से एग्रीमेंट बनाने को कहें. आपके काम करने के बाद आपके काम का सही मूल्य मिले, आपको सही केडिट मिले, ये आपका हक़ है, लेकिन ये हक़ आपको मिले इसके लिए जरूरी है कि काम शुरू करने से पहले आप निर्माता या जिस व्यक्ति के साथ काम कर रहे हैं, उसके साथ लिखित एग्रीमेंट कर लें, क्योंकि विवाद होने की स्थिति में यही वह दस्तावेज है, जो आपको आपका हक़ दिलवा पायेगा.

    हालांकि फिल्म या टीवी राइटिंग के मामले में निर्माता के लिए भी यह जरूरी है कि वह लेखक के साथ एग्रीमेंट साइन कर ले, क्योंकि फिल्म या सीरियल बनाने से पहले लेखक की लिखित सहमति लेना जरूरी है. अगर निर्माता लेखक से अनुमति पत्र साइन करवाने के बिना कोई काम शुरू करता है या रिलीज करता है तो वह कानूनी पचड़े में फंस सकता है और कॉपीराइट उल्लंघन के जुर्म में उसे सजा हो सकती है. बावजूद इसके निर्माता इस मामले में प्रायः सुस्ती दिखाते हैं. हाँ लेकिन आपने देखा होगा कि प्रोड्यूसर कंसेंट लेटर साइन करवाने के मामले में बड़े

    बड़े मुस्तैद होते हैं. क्योंकि प्रोड्यूसर कंसेंट लेटर साइन करवाकर सुरक्षित हो जाते हैं, लेकिन लेखक असुरक्षित रह जाता है, क्योंकि उसने कोई एग्रीमेंट साइन नहीं किया कि पारिश्रमिक के तौर पर उसे कितने पैसे मिलेंगे, कब कब और कितनी किश्तों में मिलेंगे ? स्क्रीन पर लेखक का नाम कहाँ आयेगा, कैसे आयेगा? पब्लिसिटी में कहाँ कहाँ स्थान मिलेगा ? आदि आदि.

    ऐसी स्थिति में प्रोड्यूसर या कोई और, जिसके साथ आपने काम किया है, आपके मुनासिब हक़ से आपको वंचित कर सकता है. संभव है वो आपको उचित पारिश्रमिक न दे. आपका नाम भी सही तरीके से न दे. कुछ ऐसा हो सकता है, जो आपके मन के या हक़ के विपरीत हो सकता है. वह आपकी कहानी या स्क्रिप्ट में आपकी मर्जी के विपरीत किसी और का या अपना नाम भी स्क्रिप्ट राइटर का नाम भी दे सकता है. इसलिए लेखकों की खुद की जिम्मेदारी है कि आप अपनी सुरक्षा को लेकर खुद जागरूक हों.

    उचित पारिश्रमिक न मिलने या नाम सही जगह नहीं देने या पब्लिसिटी में जगह नहीं देने की शिकायत लेकर प्रायः लेखक स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन आते रहते हैं. एसोसिएशन जब उनसे एग्रीमेंट की कॉपी मांगता है, प्राय लेखकों का जवाब होता है, एग्रीमेंट तो नहीं बनाया. प्रोड्यूसर दोस्त था, इसलिए चुप रह गया कि वह धोखा नहीं करेगा, प्रोड्यूसर आज कल करता रहा और आजतक एग्रीमेंट नहीं बनाया, आदि इत्यादि. लेकिन ऐसी स्थिति में फंसे लेखक ये नहीं समझ पाते कि एग्रीमेंट नहीं होने की स्थिति में एसोसिएशन भी उनकी बहुत मदद नहीं कर पायेगा. हालांकि एसोसिएशन ऐसी स्थिति में फंसे लेखकों का भी हर संभव सहयोग करता है, लेकिन एग्रीमेंट नहीं होने की स्थिति में एसोसिएशन के हाथ भी बंधे होते हैं.

     

    भरोसे पर आँख मूँद कर एग्रीमेंट साइन मत कीजिये!

    लिखने से पहले एग्रीमेंट कर लेना ज़रूरी है, लेकिन सिर्फ एग्रीमेंट कर लेना ही जरूरी नहीं है. उससे ज्यादा जरूरी यह देखना है कि एग्रीमेंट में लिखा क्या क्या है ?

    आमतौर पर लेखक पारिश्रमिक की राशि, कब कब कितना देंगे और किस रूप में उनका नाम परदे पर जाएगा, इतना ही देखते हैं, लेकिन इतना ही देख कर एग्रीमेंट साइन कर देना, सही नहीं है. ऐसा एग्रीमेंट आपके लिए घातक हो सकता है. इसलिए एग्रीमेंट में किन किन बातों का होना और नहीं होना जरूरी है, इसे मोटे तौर पर समझ लेना आवश्यक है. लिहाजा, पहली बात तो यह है कि एग्रीमेंट साइन करने से पहले उसे अच्छी तरह पढ़ लिया करें, भरोसे पर आँख मूँद कर कभी कोई भी एग्रीमेंट साइन न करें. संभव हो तो कॉपीराइट के किसी जानकार वकील या एसोसिएशन के वकील से संपर्क कर उसपर पहले राय ले लें, फिर एग्रीमेंट साइन करें.

    हमारी इंडस्ट्री में आम समझ है कि फिल्म या सीरियल का मालिक चूँकि निर्माता है, इसलिए एग्रीमेंट उसके अनुसार ही होगा. ये धारणा गलत है. निर्माता फिल्म या सीरियल का मालिक जरूर है, लेकिन स्क्रिप्ट का मालिक निर्माता नहीं, लेखक है, और लेखक जबतक निर्माता को उस कहानी पर फिल्म या स्क्रिप्ट बनाने की लिखित अनुमति नहीं देता, वह फिल्म या सीरियल नहीं बना सकता.

    दूसरी बात एग्रीमेंट तब वैध होता है, जब एग्रीमेंट में लिखी बातों और शर्तों पर दोनों की सहमति हो और दोनों के हक़ की बातें और शर्ते उसमें शामिल हों, एकतरफा शर्तों वाले एग्रीमेंट गलत हैं. इसलिए आप एग्रीमेंट साइन करने से पहले ये देख लें कि एग्रीमेंट में आपका भी पक्ष है या नहीं. मसलन, निर्माता ने अगर यह लिखवा रखा है कि लेखक को एक महीने की नोटिस देकर हटाया जा सकता है, तो आपकी भी शर्त होनी चाहिए कि लेखक भी किसी भी वक्त एक महीने का नोटिस देकर प्रोजेक्ट छोड़ सकता है. कहने का आशय है, जो अधिकार निर्माता के पास है, वो अधिकार लेखक के पास भी हों.

    पारिश्रमिक की कुल राशि कितनी है, कितनी किश्तों में कब कब कितनी कितनी राशि दी जायेगी ये सब भी स्पष्ट लिखा जाना जरूरी है. इसी तरह यह लिखा जाना भी जरूरी है कि स्क्रीन और पब्लिसिटी पर लेखक का नाम किस तरह आयेगा और कहाँ आयेगा.

    और सबसे महत्वपूर्ण बात जो कि 2012 के कॉपीराइट एक्ट संशोधन बिल के बाद जुड़ी है, वो ये कि कॉपीराइट एक्ट के तहत जो रॉयल्टी आयेगी, उसपर लेखक का अधिकार होगा. जबसे लेखकों को रॉयल्टी मिलने का कानूनी प्रावधान हुआ है, निर्माता एग्रीमेंट बनाते वक्त चालाकी करने लगे हैं, और अगर आपने भी उन बातों पर ध्यान नहीं दिया तो कॉपीराइट एक्ट ने रॉयल्टी पाने का जो आपको अधिकार दिया है, उससे आप वंचित हो सकते हैं. इसलिए एग्रीमेंट साइन करने से पहले यह देख लीजिये कि कहीं ऐसा तो नहीं लिखा है कि यह स्क्रिप्ट आप फलां की गाइडेंस में या इतने रूपये महीने पर लिख रहे हैं? या वर्क फॉर हायर लिखा हो? अगर ऐसा लिखा हो तो समझ लीजिये आपका रॉयल्टी पाने का अधिकार यानी मालिकाना अधिकार आपसे छीना जा रहा है. इसलिए ऐसा एग्रीमेंट साइन मत कीजिये.

     

    प्रोड्यूसर अगर एग्रीमेंट बनाने में देर करे तो 'ये' करें !

    प्रायः लेखकों की शिकायत होती है कि प्रोड्यूसर ने एग्रीमेंट किया ही नहीं या किया तो दिया ही नहीं. ऐसी स्थिति में लेखकों को चाहिए कि या तो आप काम करने से मना कर दें या अगर काम करना मजबूरी बन जाय तो अपनी तरफ से एग्रीमेंट बनाकर प्रोड्यूसर को मेल कर दें. उदाहरण के तौर पर इसे इस तरह समझिए- किसी प्रोड्यूसर से आपकी बात होती है कि आप लेखक के तौर पर उनकी फिल्म या सीरियल के लिए काम करें, तो क्या क्या लिखना है ये स्पष्ट कर लें, नाम किस तरह जाएगा यह स्पष्ट कर लें और पैसे कितने और किस तरह मिलेंगे ये भी स्पष्ट कर लें. उसके बाद इन सारी बातों को लिखकर उस प्रोड्यूसर को मेल कर दें कि फलां तारीख को हम फलां जगह मिले और हमारे बीच ये ये बातें हुईं, जबतक एग्रीमेंट नहीं बनता है, तबतक याद रखने के लिए आपको ये मेल भेज रहा हूँ, ताकि किसी किस्म की गलतफहमी हमारे आपके बीच न हो पाए. इसके आखिर में यह लिखना भी न भूलें कि अगर दोनों में किसी को भी लगे कि आगे काम करना संभव नहीं है तो पूर्व सूचना देकर दोनों अलग हो सकते हैं.

    लेखकों की मदद के लिए एसोसिएशन ने मॉडल एग्रीमेंट बनाया हुआ है, अगर आप चाहें तो एसोसिएशन को इस बावत मेल करें और अपने मेल पर मॉडल कॉन्ट्रैक्ट मंगवा लें और उसमें अपने मुताबिक़ बदलाव कर प्रोड्यूसर को मेल कर दें और उस पर उनकी सहमति ले लें. अगर वह रिप्लाई न करें, तो एक बार उन्हें फिर से याद दिला दें और अपना काम आगे बढ़ाएं. ऐसी स्थिति में उनके जवाब नहीं देने के बाद भी आपका पक्ष मजबूत हो जाएगा.

    एग्रीमेंट होने की स्थिति में दोनों पक्षों का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर जरूरी है और हस्ताक्षर हर पृष्ठ पर जरूरी है. प्रिंट निकालने के बाद कहीं कोई सुधार/बदलाव किया गया हो, तो वहां भी दोनों के हस्ताक्षर जरूरी हैं. एग्रीमेंट या कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के बाद भी कभी अगर लगे कि प्रोड्यूसर अपना वादा निभाने में सक्षम नहीं हो पा रहा है या प्रोड्यूसर आपकी कहानी या स्क्रिप्ट पर आपके सोच के अनुसार फिल्म नहीं बना पा रहा है, तो आप उसे रोक सकते हैं और उसे इस बाबत पूर्व सूचना देकर कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म कर सकते हैं.

    उम्मीद है कि कम से कम इस लेख के पाठक तो आज के बाद बिना कॉन्ट्रैक्ट काम नहीं करेंगे.

    अगली किस्त में बात करेंगे कि कॉपीराइट, क्रेडिट या भुगतान को लेकर निर्माता से विवाद होने पर क्या किया जाए.

    धनंजय कुमार हिंदी और भोजपुरी फ़िल्म-टीवी लेखक के तौर पर जाने जाते हैं। आप वर्तमान में स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष का पदभार सम्भालने के साथ एसोसिएशन की डिसप्यूट सैटलमेंट कमेटी (डीएससी) के सदस्य भी हैं।