•  डॉ. मनीष कुमार जैसल
    •  24 September 2020
    •  495

    एसडबल्यूए अवार्ड्स हैं! स्वागत कीजिये! 

    एसडबल्यूए अवार्ड्स 2020 पर एक नज़र 

    किसी भी फ़िल्म/सीरियल/ टीवी शो का लेखक उस कृति का सर्वप्रथम हक़दार होता है। यही लेखक अपनई शख़्सियत और क्रेडिट की लड़ाई साहिर लुधियानवी और शैलेंद्र के ज़माने से लड़ रहा है। पेशेवर हितों से जुड़े कई ऐसे क़ानूनी अधिकार हैं जो उसे मिलने चाहिए लेकिन अमूमन दरकिनार किये जाते है। लेखकों के इन्हीं हितों के लिए संघर्ष करने वाली ट्रेड यूनियन फ़िल्मराइटर्स असोसिएशन (ऍफ़डबल्यूए, भूतपूर्व नाम) का 1960 से शुरू हुआ सफ़र 2020 में स्क्रीनराईटर्स असोसिएशन (एसडबल्यूए) तक पहुँच चुका है। इस संगठन के साठ साल पूरे हो चुके हैं। 2020 में जहाँ एक ओर पूरी दुनियाँ कोविड 19 के संक्रमण से जूझ रही हैं, उद्योग धंधे बाँध हो रहे हैं, वहीं स्क्रीनराईटर एसोसिएशन ने एसडबल्यूए अवार्ड 2020 का एलान किया है जिसे ऑनलाइन आयोजित किया जायेगा। तारीख है 27 सितम्बर 2020, रविवार, जिसमें हिंदी भाषा की फ़िल्म / वैब सीरीज़ / टीवी शो के लिए सर्वश्रेष्ठ संवाद, गीत, पटकथा, कहानी, फ़िल्म आदि कैटेगरी में अवार्ड दिए जाने हैं। यह भारतीय सिनेमा के सौ वर्षों के इतिहास में पहला ऐसा मौक़ा है जब परदे के पीछे रहने वाले क़लम के सिपाहियों के लिए एक विशिष्ट  सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। 

    अक्सर टीवी, फ़िल्म और वैब सीरीज़ के लेखकों को उनकी असल पहचान नहीं मिलती। पीआर और पेड़ प्रमोशन के ज़माने में लेखक के नाम की चर्चा हाशिये से भी बाहर धकेल दी गयी है। 'सौ करोड़ क्लब' की रेस के बीच किसी फ़िल्म की स्क्रिप्ट की गुणवत्ता की बात करना प्रचार तंत्र में फिट नहीं बैठता। सो 'किसने लिखा है' ये कौन पूछे? इसी तरह जब म्यूज़िक एप या यूट्यूब पर गाना चलता है तो गीतकार के नाम को जोड़ने की ज़हमत भी नहीं उठायी जाती। फ़िल्म का बॉक्स ऑफ़िस पर धमाल मचता है तो फ़िल्म के अभिनेता, अभिनेत्री की ख़बरें ही चलती हैं। ज़्यादा हुआ तो निर्देशक की भी। लेखकों की इसमें क्या भूमिका रही इसके प्रति कभी ईमानदारी से नहीं सोचा जाता। यहां तक कि समीक्षकों ने भी लम्बे समय तक सुपरस्टार और स्टार रेटिंग सिस्टम को आगे बढ़ाते हुए ही समीक्षाएँ लिखी है। 

    स्क्रीनराईटर्स एसोसिएशन द्वारा दिए जा रहे एसडबल्यूए अवार्ड 2020  के आयोजन को प्रथम दृष्ट्या देखा जाए तो यह अपने आप में अनोखा है। क्योंकि यह लीक से हट कर सोचने वालों के सौजन्य से आयोजित हो रहा है। आप सोचिए कि अगर ऐसा आयोजन ना किया जाए तो क्या कभी किसी फ़िल्म / वैब सीरीज़ / टीवी शो के लेखक और गीतकार वो शोहरत मिल पाएगी जो उसकी लिखी कहानी या गीत पर अभिनय या अपनी आवाज़ देकर दूसरे कलाकारों को मिलती है। यही सवाल इस पुरस्कारों की अहमियत को दिखाता है।

    स्क्रीनराईटर्स असोसिएशन ने लेखकों की कई कैटेगरी में लेखकों से दिसंबर 2019  से मार्च 2020 तक आवेदन माँगे थें। पिछले वर्ष रिलीज़ हुई हिंदी फिल्मों को पहले ही इसमें शामिल कर लिया गया था। इस तरह कुल 223 फ़ीचर फ़िल्म, 146 टीवी शो, 43 वैब सिरीज़, 46 लिरिक्स का आवेदन आना अपने आप में बताता है कि लेखक चाहते हैं उनका नाम शोहरत की बुलंदी छुए। यहाँ एक दर्शक और मीडिया का एक छात्र होने के नाते इस आयोजन को इस संदर्भ में भी देख रहा हूँ कि इसके बहाने मैं वेब सीरीज़ के लेखकों के नाम को जान पाउँगा। चूँकि अमेजन प्राइम, नेटफ़्लिक्स, वूट, हॉट स्टार डिज़्नी जैसे अन्य ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर वैब सीरीज़ के लेखकों के नाम को खोजना एक टेढ़ी खीर साबित होता है। (हमारी एक पड़ताल में हम स्क्रीनराईटर्स एसोसिएशन के पाठकों को भी इस बारे में बता चुके हैं। लिंक: https://www.swaindia.org/article_dyn.php?q=T1RZPQ== )

    एसडबल्यूए अवार्ड्स 2020 में शामिल होने वाले सभी लेखकों के व्यक्तिगत अनुभव फ़ेसबुक और ट्विटर पर पढ़े भी जा सकते हैं, लेकिन यहाँ कुछ का ज़िक्र करना इसलिए भी ज़रूरी है ताकि हम अपने पाठकों को बता सके कि कोई भी फ़िल्म शुरू किसी लेखक की कहानी से होती है और उसका अंत लेखक के लिखे कहानी के अंत से ही।

    जातिवाद के मुद्दे पर बनी फ़िल्म में आर्टिकल 15 का नाम आते ही सबसे पहले आयुष्मान खुराना का नाम सबसे पहले आता होगा, लेकिन एक अच्छा दर्शक वही है जिसे किसी भी फ़िल्म को देखते समय फ़िल्म के लेखक और निर्देशक के बारे में जानकारी हो। अनुभव सिन्हा और गौरव सोलंकी की लिखी इस फ़िल्म ने फिल्म उद्योग को असल मुद्दों की गहराई में झाँकने के लिए प्रेरित किया है। फ़िल्म की कहानी से लेकर संवाद और पटकथा में अनुभव और गौरव ने अपनी बारीक समझ दर्शायी है। इसी का प्रतिफल है कि एसडबल्यूए अवार्ड 2020 में फ़िल्म सर्वश्रेष्ठ संवाद, पटकथा और कहानी के लिए नामित हुई है । इसी मौक़े पर गौरव सोलंकी ने कहा कि - “यह बहुत ही ख़ास नामांकन है, लेखकों द्वारा, लेखकों के लिए पुरस्कार। मुझे उम्मीद है कि इस बहाने हम एक दूसरे का हौसला बढ़ाते रहेंगे, कमियों और ग़लतियों पर टोकते भी रहेंगे और जब-जब किसी का काम अच्छा लगेगा, उसकी पीठ थपथपाएंगे। हम बेहतर कहानियाँ और स्क्रीनप्ले लिखने की कोशिश करते रहें, नए रास्तों पर चलें। यह उसी का जश्न है।”

    वहीं फ़िल्म के सह-लेखक और निर्देशक अनुभव सिन्हा ने भी अपने अनुभव शेयर करते हुए कहते हैं कि  “मुझे बहुत ख़ुशी है कि ‘आर्टिकल 15’ की पठकथा लेखन के लिए मुझे एसडबल्यूए अवार्ड्स के लिए नामांकित किया गया है और यह वाकई में बहुत अद्भुत है कि आपके साथियों, आपके वरिष्ठों को लगता है कि आपने जो लिखा था वह इस तरह के सम्मान के योग्य है। ज्यूरी मेम्बर्स और एसडबल्यूए बहुत बहुत धन्यवाद।”

    फ़िल्म लेखक ने क्षेत्र में जो युवा कैरियर बनाना चाहते हैं या अब तक भारतीय फ़िल्म उद्योग में लेखक की भूमिका में वर्षों से स्ट्रगल कर रहे हैं उन्हें एसडबल्यूए अवार्ड 2020 की सर्वश्रेष्ठ डेब्यू राईटर की कैटेगरी एक नई उम्मीद जगाती ज़रूर दिखेगी। पिछले साल फिल्म समारोहों में आयी फ़िल्म चिंटू का बर्थडे को भले ही सही से थिएटर रिलीज़ नही मिली, पर अब इस फ़िल्म का एसडबल्यूए अवार्ड्स 2020 में बेस्ट डेब्यू राईटर कैटेगरी के साथ सर्वश्रेष्ठ  कहानी और पटकथा के लिए नामित होना एक सुखद अहसास देता है। फ़िल्मों के लिए पहली बार लिख रहे देवांशु सिंह ने कहा भी कि  "हम दोनों (देवांशु सिंह, सत्यांशु सिंह) के लिए यह बहुत खुशी और गर्व की बात है, कि हमारी पहली स्क्रिप्ट को एसडबल्यूए पुरस्कारों के पहले संस्करण में 3 श्रेणियों (सर्वश्रेष्ठ कहानी, सर्वश्रेष्ठ पटकथा और डेब्यू राइटर) में नामांकित किया गया है। हमने यह स्क्रिप्ट 2007 में पटकथा लेखन में किसी भी औपचारिक प्रशिक्षण के बिना लिखी थी। पिछले 10 वर्षों में, जैसे जैसे हम इस क्राफ्ट को सीखते गए, हमारी स्क्रिप्ट भी निखरती गयी। लेखन असीम धैर्य और परिश्रम का खेल है और इसके लिए पुरस्कृत किया जाना बहुत बड़ी बात है। हमें इतने शानदार लेखकों के बीच नामांकित करने के योग्य समझने के लिए जूरी का बहुत बहुत धन्यवाद। इस पुरस्कार को शुरू करने के लिए एसडबल्यूए को विशेष धन्यवाद। यह निश्चित रूप से हमारे जैसे उभरते लेखकों को प्रोत्साहित करेगा।"

    वहीं बेस्ट डेब्यू राईटर कैटेगरी में शामिल हुई एक और फ़िल्म सोनी के लेखक इवान अय्यर और किसलय इसे एक बड़ी उपलब्धि मानते हैं। इवान कहते भी हैं कि "मैं स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन और अवार्ड्स समिति 2020 का इस नामांकन के लिए बहुत आभारी हूं। अपने सहकर्मियों और समकालीनों द्वारा पहचाने जाने से बड़ा दूसरा कोई सम्मान नहीं होता, इसलिए ये बेहद खास है।"

    देश में प्रति वर्ष 2000 से ज़्यादा फ़िल्मों का निर्माण होता है। कई फ़िल्में तो ऐसी होती हैं जिनका नाम भी दर्शक को 2-3 साल बाद पता चलता हैं। ऐसे में इन्हीं फ़िल्मों के लेखकों का गुमनाम रहता है। चौसर फ़िरंगी नाम की फ़िल्म कब आयी और कब गई आपको भले ही ना पता हो लेकिन लेखन के संदर्भ में फ़िल्म का बेस्ट डेब्यू राईटर के लिए नामित होना बताता है कि फ़िल्म में कुछ दम तो होगा। फ़िल्म के लेखक संदीप पांडे की बात को नकारा नहीं जा सकता। वे कहते हैं कि  “फिल्म के सारे तत्व देखे जाए तो लेखन बहुत बड़ी अहमियत रखता हैं, फिल्म की शुरुआत लेखन से ही होती हैं, और युवा एवं प्रोफेशनल लेखकों को प्रोत्साहन और उनकी कला को रजिस्टर्ड करने का प्लेटफार्म स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन प्रदान करता है। मेरे लिए ये सौभाग्य का विषय है कि स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित एसडबल्यूए अवार्ड्स में मेरे द्वारा लिखित और निर्देशित 'चौसर फिरंगी' के लिए मुझे डेब्यू राइटर के लिए नॉमिनेट किया गया, इसके लिए मैं ज्यूरी और एसडबल्यूए को धन्यवाद देता हूँ।आशा करता हूँ कि एसडबल्यूए ऐसे ही कलाकारों को प्रोत्साहित करता रहेगा।”

    2019 की एक और फ़िल्म है हामिद, जो 7 साल के एक ऐसे बच्चे की कहानी कहती है जिसके पिता खो चुके हैं। अपने पिता के खोजने की पूरी दास्ताँ को फ़िल्म के लेखक रविंदर रंधावा से जिस अदायगी से लिखा है वह दर्शकों में अलग छाप छोड़ता है। फ़िल्म एसडबल्यूए अवार्ड्स 2020 में बेस्ट डेब्यू राईटर के लिए नामित हुई है। रविंदर कहते हैं कि “अपने समुदाय के मित्रों द्वारा सराहने और जश्न मनाए जाने से ज्यादा महत्वपूर्ण और हार्दिक ख़ुशी कुछ भी नहीं हो सकती है। इसलिए, मैं पहली बार एसडबल्यूए अवार्ड्स के लिए नामांकित होने से बेहद खुश हूं। इन अवार्ड्स की सबसे ख़ास बात यह है कि इनके लिए एकमात्र विचार स्क्रिप्ट की गुणवत्ता है ना कि फिल्म का कुल व्यवसाय। मुझे पूरी उम्मीद है कि ये अवार्ड्स हम लेखकों में अच्छे लेखन का विश्वास पैदा करेंगे और लेखकों को सर्वोतम लिखने के लिए प्रेरित करेंगे।”

    आइए, एक नज़र डालते हैं एसडबल्यूए अवार्ड्स के विभिन्न नामांकनों पर: 

     

    टीवी कॉमेडी-सर्वश्रेष्ठ कहानी

    लक्ष्मी जयकुमार और शक्ति सागर चोपड़ा :-- अलादीन - नाम तो सुना होगा

    मनोज संतोषी, संजय कोहली और शशांक बाली -भाभीजी घर पर है!

    रघुवीर शेखावत -जीजाजी छत पर है

    नितिन केसवानी -तारक मेहता का उल्टा चश्मा
     

    टीवी कॉमेडी-सर्वश्रेष्ठ संवाद  

    भावना व्यास --बावले उतावले  

    मनोज संतोषी - भाभीजी घर पर है!

    आतिश कपाड़िया -भाखरवड़ी  

    रघुवीर शेखावत -जीजाजी छत पर है  

     

    टीवी कॉमेडी - सर्वश्रेष्ठ पटकथा  

    आंचल अग्रवाल -अलादीन - नाम तो सुना होगा

    भावना व्यास -बावले उतावले  

    मनोज संतोषी, संजय कोहली और शशांक बाली - भाभीजी घर पर हैं !

    आतिश कपाड़िया -भाखरवड़ी  

    रघुवीर शेखावत, संजय कोहली और शशांक बाली- जीजाजी छत पर हैं


     

    टीवी ड्रामा - सर्वश्रेष्ठ संवाद  

    योगेश विक्रांत- एक महानायक - डॉ बी आर अम्बेडकर

    ज़मा हबीब -इशारों इशारों में  

    अपराजिता शर्मा और दिव्य निधि शर्मा- कुल्फी कुमार बाजेवाला  

    प्रीति मामगेन -मेरे डैड की दुल्हन

    विनोद शर्मा -राम सिया के लव कुश  

     

    टीवी ड्रामा- सर्वश्रेष्ठ पटकथा  

    रेणु वाटवानी और विशाल वाटवानी- छोटी सरदारनी

    कुमार प्रभात -एक महानायक-डॉ बी आर अम्बेडकर  

    ज़मा हबीब -इशारों इशारों में  

    फ़ैज़ल अख्तर और पंकज उनियाल -झांसी की रानी  

    कार्तिक सीतारमन -मेरे डैड की दुल्हन

     

    वैब सिरीज़ - सर्वश्रेष्ठ ओरिजिनल ड्रामा

    रिची मेहता और संयुक्ता चावला शेख- दिल्ली क्राइम

    अभिषेक यादव, संदीप जैन और सौरभ खन्ना --कोटा फैक्ट्री  

    अभिषेक सेनगुप्ता, अनुराधा तिवारी, बिस्वा कल्याण रथ और हुसैन हैदरी- लाखों में एक-सीज़न 2

    अलंकृता श्रीवास्तव, रीमा कागती और ज़ोया अख्तर-- मेड इन हेवेन

    राज और डीके, सुमन कुमार और सुमित अरोड़ा-- द फैमिली मैन

     

    वैब सिरीज़ - सर्वश्रेष्ठ ओरिजिनल कॉमेडी

    आयशा नायर, मैत्रेयी उपाध्याय, नयना श्याम और प्रेक्षा खन्ना- एडल्टिंग सीज़न 2

    देविका भगत और इशिता मोइत्रा - फोर मोर शॉट्स प्लीज़!

    आशीष मनचंदा, चिराग रत्न सिंह और श्रेयसी शर्मा-- गर्ल्स हॉस्टल

    आकर्ष खुराना और सुमीत व्यास-- ट्रिपलिंग-सीज़न 2

    अजयदीप सिंह और मनीष कुमार --वर्जिन भास्कर

     

    वैब सिरीज़ - सर्वश्रेष्ठ Adaptation

    असद हुसैन, दीपा मेहता, पैट्रिक ग्राहम, सुहानी कंवर और उर्मी जुवेकर- लैला

    ध्रुव नारंग, निहित भावे, पूजा तोलानी और वरुण ग्रोवर -- सेक्रेड गेम्स- सीज़न 2

    मारस्टन ब्लूम, सुमित अरोड़ा और तनुजा चतुर्वेदी-- सिलेक्शन डे

     

    सर्वश्रेष्ठ गीत -टीवी शो / वेब सिरीज़ 

    ज़मा हबीब- टीवी शो इशारों इशारों में - गीत "एक चुप तुम , एक चुप मैं",

    शशांक कुंवर -टीवी शो कुल्फी कुमार बाजेवाला - गीत "पेट बेचारा"  

    मजाल - वेब सिरीज़ लाखों में एक - सीज़न 2 - गीत "निशानियां"  

    मजाल - वेब सिरीज़ लाखों में एक सीज़न 2 - गीत "रूह"  

    शेखर अस्तित्व --टीवी शो राधाकृष्ण -टाइटल ट्रैक  

     

    सर्वश्रेष्ठ गीत- फीचर फिल्म्स  

    अंकुर तिवारी और डीवाइन - फिल्म गली बॉय - गीत "अपना टाइम आएगा"

    डीवाइन और नेज़ी - फिल्म गली बॉय - गीत " मेरे गली में"

    अमिताभ भट्टाचार्य -फिल्म कलंक - टाइटल ट्रैक

    मनोज मुंतशिर -फिल्म केसरी - गीत "तेरी मिट्टी"  

    वरुण ग्रोवर -फिल्म सोनचिड़िया - गीत "रुआ रुआ"  

     

    सर्वश्रेष्ठ जेंडर सेंसिटिव स्क्रिप्ट  

    सागर गुप्ता और श्रीधर रंगायन—इवनिंग शैडोज़

    कासिम खालो -- गौन केश  

    इवान अय्यर और किसलय --सोनी  

    फैज़ल अख्तर, समीर सिद्दीकी और श्राबनी देवधर-- द शोले गर्ल

    फारुक कबीर, काशान मुस्तफा और सिद्धार्थ मिश्रा -- 377 अब नॉर्मल

     

    फ़ीचर फिल्म्स - सर्वश्रेष्ठ डेब्यु लेखक

    देवांशु सिंह और सत्यांशु सिंह-- चिंटू का बर्थडे

    संदीप पांडे - चौसर फिरंगी  

    रविंदर रंधावा -हामिद  

    आदिश केलुस्कर --जाऊं कहां बता ऐ दिल  

    इवान अय्यर और किसलय -- सोनी  

     

    फीचर फिल्म्स - सर्वश्रेष्ठ संवाद  

    अनुभव सिन्हा और गौरव सोलंकी- आर्टिकल 15

    नीरेन भट्ट --बाला  

    विजय मौर्या - गली बॉय  

    रविंदर रंधावा और सुमित सक्सेना --हामिद  

    सुदीप शर्मा --सोनचिड़िया  

     

    फीचर फिल्म्स - सर्वश्रेष्ठ कहानी  

    अनुभव सिन्हा और गौरव सोलंकी-- आर्टिकल 15

    देवांशु सिंह और सत्यांशु सिंह-- चिंटू का बर्थडे

    रीमा कागती और ज़ोया अख्तर --गली बॉय  

    अभिषेक चौबे और सुदीप शर्मा --सोनचिड़िया  

    इवान अय्यर --सोनी  

     

    फ़ीचर फिल्म्स - सर्वश्रेष्ठ पटकथा  

    अनुभव सिन्हा और गौरव सोलंकी-- आर्टिकल 15

    नीरेन भट्ट --बाला  

    देवांशु सिंह और सत्यांशु सिंह-- चिंटू का बर्थडे 

    रीमा कागती और ज़ोया अख्तर--गली बॉय  

    वासन बाला --मर्द को दर्द नहीं होता

     
    फ़िल्म /गीत/ वैब सीरीज़/ टीवी /शो लेखन के क्षेत्र में एसडबल्यूए द्वारा दिए जा रहे इन सभी कैटेगरी में अवार्ड पर अगर ग़ौर करें तो पाएँगे कि सिर्फ़ वैब सीरीज़ और वैब शो में ही कई कैटेगरी में कई नामांकन हुए हैं, जो आने वाले समय में और भी बढ़ सकते हैं। एक नए प्रयोग के तौर पर भी एक दर्शक को इस समारोह को देखना चाहिए, जो सार्थक और सकारात्मक दिशा में जाता हुआ दिख रहा है। प्रतिवर्ष SWA अवार्ड्स अगर दिए जाएँगे तो यह सम्भव है कि सभी कैटेगरी से लेखकों की एक अच्छी ख़ासी संख्या सम्मानित होगी और इसका असर आने वाले वर्षों में इस संदर्भ में भी देखने को मिलेगा कि दर्शक और स्वयं फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग किसी भी लेखक को उसका हक़ ज़रूर देंगे। यहाँ यह भी ग़ौर करने की ज़रूरत है कि SWA अवार्ड्स की सलैक्शन कमेटी से लेकर अवार्ड के ज्यूरी सदस्यों में उन्ही लोगों का चुनाव किया गया हैं जो लेखन के क्षेत्र में वर्षों से काम कर रहे हैं। एक फ़िल्म रसिक होने के बावजूद इसमें कई नाम ऐसे हैं जिन्हें पहली बार ही सुना है लेकिन उनका लिखा कई बार और बार बार देखा जा चुका है। फ़ीचर फ़िल्म के लिए विनय शुक्ला, विजय कृष्णा आचार्य, उर्मी जुवेकर, साकेत चौधरी, जूही चतुर्वेदी, अतुल तिवारी, अशोक मिश्रा जैसे नामी लेखक निर्णायक मंडल में हैं। वहीं वैब सीरीज़ के लिए केतक़ी पंडित, अनुया जकातदार, अनुराधा तिवारी, शिव सुब्रमणयम, रेशु नाथ, जूही शेखर, स्वेच्छा भगत, सुहैल ततारी,  रुचि नरायण और बेस्ट लिरिसिस्ट के ज्यूरी सदस्यों में पंछी जलायूनी, मयूर पूरी, कौसर मुनीर, इला अरुण, अमित खन्ना को शामिल किया गया हैं । 

    स्क्रीनराइर्टस एसोसिएशन मुंबई ने अपनी हीरक जयन्ती के मौके पर एक नयी नींव रख दी है। आगामी 27 सितम्बर 2020, रविवार, का दिन फ़िल्म विधा से जुड़े लेखकों के लिए नए काल में पहले क़दम जैसा साबित होगा। समय है शाम 6 बजे। स्थान, फेसबुक और यूट्यूब। मैं तो ऑनलाइन रहूँगा।   

    डॉ. मनीष कुमार जैसल मंदसौर यूनिवर्सिटी, मध्य प्रदेश, में जनसंचार एवं पत्रकारिता के सहायक प्रोफेसर हैं । नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी नई दिल्ली के बुक फ़ेलो और सहपीडिया यूनेस्को के रिसर्च फ़ेलो भी रह चुके हैं। फ़िल्मकार मुजफ्फर अली पर किताब 'फिल्मों का अंजुमन: मुजफ्फर अली' प्रकाशित। सेंसरशिप और सिनेमा पर पीएचडी। नियमित आलेख और संगोष्ठियों में वाचन। संपर्क: mjaisal2@gmail.com